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फर्जी TRP केस: रिपब्लिक देखने के लिए रॉकी नाम का शख्स देता था विशाल भंडारी को पैसे

टीआरपी फर्जीवाड़े में रिपब्लिक टीवी की हकीकत सामने आने लगी है. मुंबई पुलिस की पड़ताल में हंसा रिसर्च के पूर्व कर्मचारी विशाल भंडारी की डायरी से कई खुलासे हुए हैं. इस डायरी में कई घरवालों के नाम दर्ज हैं. इन घरवालों से जब पुलिस ने पूछताछ की तो सामने आया कि रिपब्लिक टीवी को देखने के लिए हर महीने तयशुदा रकम दी जाती थी

फर्जी TRP केस: रिपब्लिक देखने के लिए रॉकी नाम का शख्स देता था विशाल भंडारी को पैसे

टीआरपी फर्जीवाड़े में रिपब्लिक टीवी की हकीकत सामने आने लगी है. मुंबई पुलिस की पड़ताल में हंसा रिसर्च के पूर्व कर्मचारी विशाल भंडारी की डायरी से कई खुलासे हुए हैं. इस डायरी में कई घरवालों के नाम दर्ज हैं. इन घरवालों से जब पुलिस ने पूछताछ की तो सामने आया कि रिपब्लिक टीवी को देखने के लिए हर महीने तयशुदा रकम दी जाती थी.

टीआरपी फर्जीवाड़े में रिपब्लिक टीवी की हकीकत सामने आने लगी है. मुंबई पुलिस की पड़ताल में हंसा रिसर्च के पूर्व कर्मचारी विशाल भंडारी की डायरी से कई खुलासे हुए हैं. इस डायरी में कई घरवालों के नाम दर्ज हैं. इन घरवालों से जब पुलिस ने पूछताछ की तो सामने आया कि रिपब्लिक टीवी को देखने के लिए हर महीने तयशुदा रकम दी जाती थी.

मुंबई पुलिस की पूछताछ में कई घरवालों ने कहा कि हमें विशाल भंडारी की ओर से रिपब्लिक टीवी देखने के लिए हर महीने पैसा दिया गया. मुंबई पुलिस ने विशाल भंडारी और घरवालों के बीच मैसेज का आदान-प्रदान भी पकड़ा है. रिपब्लिक चैनल की टीआरपी उन्हीं घरों में अधिक पाई गई, जिन्हें विशाल भंडारी पैसे देता था. फर्जी टीआरपी मामले में गिरफ्तार किए गए विशाल भंडारी, बोमपल्ली राव, नारायण शर्मा और श्रीश शेट्टी को 13 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. इन चारों से मुंबई पुलिस पूछताछ करेगी.

मई 2020 तक इस खेल में शामिल था विशाल भंडारी

ताजा जानकारी के मुताबिक विशाल भंडारी इस गोरखधंधे में नवंबर 2019 से मई 2020 तक शामिल था. उसने अपने काम का गलत इस्तेमाल किया इसलिए जब इस मामले की जांच शुरू हुई तो उसे नौकरी छोड़ने के लिए कह दिया गया.

वहीं यह बात भी सामने आ चुकी है कि बोमपल्ली राव मिस्त्री विशाल के संपर्क में थे और इस काम के लिए मिस्त्री विशाल को 20,000 रुपये दे रहे थे. उन्होंने विशाल से कहा था कि वे लोगों से बॉक्स सिनेमा और फक़्त मराठी देखने के लिए कहें. विशाल ही हर घर में रिश्वत के पैसे देने जाता था लेकिन वह लोगों को 400-500 रुपये ही देता था और बाकी अपने पास रख लेता था.

रॉकी के बारे में पता लगा रही है मुंबई पुलिस

रॉकी नाम का एक अन्य व्यक्ति भी विशाल के साथ संपर्क में था ताकि वह पैसों के बदले लोगों को रिपब्लिक देखने के लिए कह सके. यह पूरा घोटाला देश भर में फैला हुआ है. बताया जा रहा है कि टीआरपी मीटर की पूरे महाराष्ट्र की सूची भंडारी के पास है, जिसे रिकवर किया जाना अभी बाकी है. किन चैनलों ने उसे पैसे दिए हैं, इसकी जांच करनी होगी. इसके लिए आरोपी का बैंक स्टेटमेंट लिया जाना है.

मुंबई पुलिस ने अपने रिमांड में रॉकी के बारे में जिक्र किया है, जिसने आरोपी विशाल से लोगों से अपने घरों में रिपब्लिक टीवी देखने के लिए कहने को कहा था. लेकिन मुंबई पुलिस अभी भी इस बात का पता नहीं लगा पाई है कि ये रॉकी कौन है.

मुंबई पुलिस ने विशाल भंडारी से उगलवाया सच

मुंबई पुलिस ने अपने रिमांड कॉपी में लिखा है कि जब विशाल भंडारी से पूछताछ की गई, तो उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने बोमपल्ली राय मिस्त्री और रॉकी के लिए काम किया था. मिस्त्री और रॉकी भंडारी को प्रति माह 20,000 रुपये का भुगतान कर रहे थे. उन्हें बताया गया था कि घरों में उन्हें लोगों को रिपब्लिक टीवी देखने के लिए राजी करना होगा. ऐसे घरों में 400 से 500 का भुगतान किया जा रहा था ताकि अधिक समय तक रिपब्लिक टीवी देखा जा सके. जब BARC से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रिपब्लिक टीवी के संदिग्ध व्यूज के बारे में डिटेल्स मुंबई पुलिस को दी हैं.

कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा

पांच अक्टूबर को मुंबई पुलिस को टीआरपी रैकेट की शिकायत मिली. इस शिकायत में कहा गया कि विशाल भंडारी और संजीव राव, लोगों को एक निश्चित चैनल देखने के लिए पैसे दे रहे थे. एपीआई सचिन वेज को टिप मिली थी. इसके बाद मुंबई पुलिस ने 5-6 अक्टूबर की रात को विशाल भंडारी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की.

विशाल भंडारी ने मुंबई पुलिस को बताया कि उसके खिलाफ जांच चल रही थी इसलिए उसने अपनी कंपनी हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड को छोड़ दिया, जो BARC के लिए एक सपोर्ट कंपनी है. पुलिस ने हंसा कंपनी से बात की और उसने माना कि विशाल उनके लिए काम करता था.

इस मामले में हंसा ने खुद ही जांच कराई थी, जिसमें 5 घरवालों से बात की गई थी. इसमें 4 ने इनकार किया, जबकि एक ने माना कि उसे चैनल देखने के लिए पैसा दिया गया. पैसा मिलने की बात मानने वाली महिला के पास एयरटेल डिशटीवी कनेक्शन है और उसके पास इंडिया टुडे का सब्सक्रिप्शन नहीं है.

जांच के दौरान एक गवाह ने बताया कि उसके घर पर एक बैरोमीटर लगा था जिसके लिए उसे हर माह 483 रुपये मिल रहे थे. गवाह के बयान के मुताबिक, ‘जनवरी 2020 में आरोपी विशाल भंडारी और दिनेश विश्वकर्मा मेरे घऱ आए. भंडारी और विश्वकर्मा ने मुझसे पूछा कि क्या मैं रिपब्लिक टीवी देखता हूं. मैंने उनसे कहा कि नहीं, मुझे रिपब्लिक टीवी पसंद नहीं है. भंडारी और विश्वकर्मा ने कहा कि यदि मैं रिपब्लिक टीवी देखूंगा और टीवी पर रिपब्लिक टीवी लगाकर उसे ऑन रखूंगा तो इसके लिए मुझे हर महीने 483 रुपये मिलेंगे.’

रिपब्लिक टीवी की सफाई

रिपब्लिक टीवी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर के खिलाफ मानहानि का केस करने की बात कही है. उसके मुताबिक मुंबई पुलिस पालघर और सुशांत सिंह केस की चैनल द्वारा की गई कवरेज के बदले में इस तरह के आरोप लगा रही है. चैनल के मुताबिक बार्क ने अपनी शिकायत में कहीं भी रिपब्लिक का नाम नहीं लिया है.

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