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गृह मंत्रालय का उद्देश्य- NRC असम में ही नहीं पूरे देश में हो लागू

 

असम में जहां राष्‍ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी, NRC) को पूर्ण रूप से लागू करने की तैयारी अपने एडवांस स्‍टेज में है। वहीं देश भर से अवैध प्रवासियों की पहचान कर बाहर निकालने की तैयारी में गृह मंत्रालय जुटा हुआ है।

सभी राज्‍यों में ट्रिब्‍यूनल

केंद्र सरकार ने 30 मई को FTs फोरेइज्नेर्स ट्रिब्‍यूनल आदेश 1964 में संशोधन कर एनआरसी से आगे की राह बना दी। संशोधन के आदेश से सभी राज्‍यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अवैध तरीके से रह रहे प्रवासियों का पहचान करने के लिए ट्रिब्‍यूनल के गठन को लेकर राज्‍य सरकारों के साथ-साथ डिस्‍ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट भी सशक्‍त हुए।

आपको बता दें कि अब तक केवल केंद्र के पास ही इस तरह के ट्रिब्‍यूनल के गठन करने का अधिकार था जो केवल असम में अर्धन्‍यायिक निकाय के तौर पर था।सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत असम में एनआरसी की प्रक्रिया पर देश भर की नजरें टिकी हैं क्‍योंकि इसकी अंतिम सूची जारी होते ही कई लाख लोग राज्‍यविहीन हो जाएंगे। असम में पहली बार 1951 में एनआरसी का गठन हुआ। 25 मार्च 1971 के बाद बांग्‍लादेश से राज्‍य में आए प्रवासियों व भारतीय नागरिकों को अलग करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निदेर्शों के अनुसार इसे अपडेट किया गया।

आपको बता दें कि न केवल असम बल्‍कि देशभर में एनआरसी लागू करने पर जोर देते हुए राज्‍यसभा में मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि अंतरराष्‍ट्रीय कानून के अनुसार भारत में रह रहे अवैध प्रवासियों को सरकार देश के हर कोने से निकाल बाहर करेगी। कोर्ट ने केंद्र व असम सरकार से 31 जुलाई तक एनआरसी के तहत अंतिम सूची प्रकाशित करने को कहा था लेकिन इसके लिए दोनों की ओर से अतिरिक्‍त समय की मांग की गई ताकि दोबारा से वेरिफिकेशन किया जा सके।गृहराज्‍यमंत्री नित्‍यानंद राय ने राज्‍यसभा में कहा था कि एनआरसी को अंतिम रूप देने में कुछ देरी हो सकती है क्‍योंकि सरकार नहीं चाहती है कि अवैध प्रवासी रह जाए और वास्‍तविक नागरिक को निकाला जाए।

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